Sunday, July 15, 2012

आस्था
भगवान को मैंने तो नहीं देखा है
ऐसा नहीं कि मैं नहीं मानता
भगवान्  को ,
मेरे पुरखो ने माना
मैं भी मानता हूँ
देखा नहीं है कभी मैंने
न तो हमारी खानदान में
किसी ने
हमने खोजा है भगवान्
अपने माँ-बाप में
यही आस्था है
यही भगवान्  के होने का सबूत भी
जहा आस्था है वही भगवान् है
जैसे मरकर भी माँ-बाप का आशीष बना रहता है
उनका एहसास बना रहता है
वैसे ही हैं भगवान्
हर जगह हमारे आसपास भी
आस्था ही तो है भगवान्
जैसे आस है तो जीवन है
वैसे ही आस्था है तो भगवान्
माँ-बाप के प्रति  बनी रहे आस्था
साकार रहेगे भगवान्
सच आस्थाही तो है भगवान् ..........नन्द लाल भारती १५.०७.२०१२

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