Wednesday, February 1, 2012

वक्त ने गुनाह कभी नहीं माफ़ किया.....

कमजोर जानकर
गैरो का हक़ चुराकर
नेक का नकाब ,लगाने वालो
ज़िंदगी को अभिशापित
कर दिया..........................
खुदा का तोहफा ज़िंदगी
जहर बना दिया
तोहफा मानने वालो ने
जहर को अमृत मान लिया.................
वक्त कहाँ किया नाइंसाफी
छिनी विरासत, चेहरा बदलने वालो ने
वक्त ने वसीयत करार दिया...............
सांस लेने का सहारा लेने वालो
गौर से सुनो
धकेला मुश्किलों के दलदल
अदनो ने इतिहास रच दिया
आँख का मरा पानी तुम्हारी
तुमने नसीब लूट लिया......................
बदले मुखौटे तरह-तरह के तुमने
मौंका-बेमौँका किये विष की खेती
तुम्हारी पहचान करना था
कठिन
लूट-झूठ का खेल कब तक चलता
वक्त ने झीना पर्दा कर दिया................
इंसान के वेष शैतान
इंसान की ज़िंदगी कर पतझर
ज़िंदगी थी बसंत तुमने
बहार छिन लिया................
जीओ और जीने दो
खुदा के प्यारे बन्दों
ज़िंदगी खुदा की बख्शीश
कमजोर जानकार
जिसने तबाह किया
खुदा गवाह,छिन ताजो-तख़्त
वक्त ने गुनाह कभी नहीं माफ़ किया.........................नन्दलाल भारती/ 02.02.2012

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